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Amber Fort – आमेर किले का इतिहास | जानिए क्या है आमेर किला रहस्य? आमेर दुर्ग में घूमने की जगह..

Amber Fort Full Guide & History in Hindi | जयपुर का आमेर किला दुनिया में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले किलों में से एक है। Amer Fort History in Hindi.

By Vijay Singh Chawandia

Updated on:

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संक्षेप में
जयपुर स्थित आमेर दुर्ग का इतिहास और घूमने की सम्पूर्ण जानकारी यहाँ उपलब्ध ।
जयपुर के आमेर किले का लाइट एंड साउंड शो की जानकारी ।
आमेर दुर्ग का रहस्य ।

Amber Fort in Hindi | आमेर किला | आमेर दुर्ग या आंबेर का किला – राजस्थान प्रदेश की सम्पूर्ण विश्व में अपने भव्य किलों और गढ़ की वजह से अलग पहचान है । राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर नामक स्थान पर अरावली पर्वत श्रृंखला पर अपनी भव्यता भीखेरता आमेर फोर्ट एक पर्वतीय दुर्ग की श्रेणी में आने वाला विशाल दुर्ग है । 16वी शताब्दी में निर्मित इस किले को बनने में 100 से अधिक वर्षों का समय लगा था, समस्त भारत में सबसे चर्चित किलों में से एक आमेर किला अपने वास्तुशिल्प शैली और गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है ।

आमेर रियासत पर कालांतर में मीणा शासकों का शासन था, किंतु बाद में कच्छवाहा क्षत्रियों ने आमेर को अपने अधीन कर लिया था । आमेर दुर्ग भारत भ्रमण करने वाले पर्यटकों के लिए एक स्वर्ग के समान है । यहां प्रतिदिन 5 हजार से ज्यादा पर्यटक भ्रमण हेतू आते है । आमेर किले का निर्माण पीले बलुआ पत्थरों से किया गया है, जो देखने में अत्यंत सुंदर लगते है ।

आज के इस लेख में हम आपको Amber Fort से जुड़ी समस्त जानकारी देंगे, जैसे:- किले की वास्तु कला, शीश महल, किले में स्थित मंदिर की जानकारी, आमेर किले का इतिहास आदि…इसलिए आपसे विनती है पोस्ट पूरी जरूर पढ़े ।

Amber Fort History in Hindi – आमेर किले का इतिहास

आमेर दुर्ग , आमेर किला या आम्बेर का किला संक्षिप्त विवरण
निर्माता काकिल देव 11वी. शताब्दी, बाद में राजा मानसिंह ने इसका निर्माण पूरा करवाया 
श्रेणी पर्वतीय दुर्ग 
स्थान जयपुर का आमेर शहर
निर्मित 1558 ईस्वी. से 1592 तक
सामग्री लाल बलुआ पत्थर एवं संगमरमर 
संरक्षित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
पयर्टन राजस्थान में सबसे अधिक देखे जाने वाला किला 

भारतीय इतिहास में आमेर किला अपनी एक अलग ही पहचान दर्ज करता है, यहां कभी मीणा जनजाति ने राज किया तो कभी क्षत्रिय कछवाहों ने अपना ध्वज लहराया । लाल बलुआ पत्थर के संगमरमर से निर्मित है किला देखने में अत्यंत ही आकर्षित है । ज्ञात तथ्यों के अनुसार आमेर अथवा आंबेर किले का नाम निकटवर्ती चील के टीले पर स्थित अंबिकेश्वर मंदिर के नाम पर पड़ा था।

Amber Fort History in Hindi | आमेर दुर्ग

अंबिकेश्वर मंदिर भगवान शिव का ही एक रूप है, आमेर शहर के स्थानीय लोगों के अनुसार अंबिकेश्वर नाम माता दुर्गा के अम्बा के नामपर ही पड़ा है । कालांतर में यहां पर मीना शासको का राज था,  जो बाद में क्षत्रिय कछवाहों केअधीन आ गया। 16वीं शताब्दी में राजा मानसिंह ने इस किले को वर्तमान स्वरूप प्रदान किया था। इस जगह को अंबावती, अमरगढ़, अमरपुरा, अंभर आदि कई नामों से जाना गया है ।

आमेर का किला रहस्य

भारत भ्रमण के लिए आने वाले जितने भी पर्यटक है वह राजस्थान के आमेर किले में एक बार अवश्य आते हैं, कछवाहा क्षत्रिय राजा मानसिंह द्वारा निर्मित यह किला जयपुर की पहचान माना जाता है, किंतु किले ने अपने अंदर कई रहस्यों को भी छुपा रखा है । तथ्यों के अनुसार राजा मान सिंह और अकबर के बीच सन्धि थी की जितने भी राज्य मानसिंह जीतेगा तो उस राज्य का धन राजा मान सिंह का होगा और राज्य पर अधिकार अकबर का होगा । इसलिए आमेर किले में मानसिंह का खजाना होने की किवंदती है, किंतु भारत सरकार के बहुत प्रयासों के बाद भी खजाना उनके हाथ नही लगा था ।

किंतु आमेर दुर्ग के निकट जयगढ़ किले से इंदिरा गांधी सरकार ने बहुत खजाना अपने ट्रक भरकर ले गई थी इस तरह के स्थानीय लोगों के दावे है । किले के अंदर बनी भूल भुलैया तेरी बड़ी रहस्यमय है, एवम् आमेर किले से नाहरगढ़ किले तक बनी अंदरुनी सुरंग का रहस्य भी आजतक अनभिज्ञ है।

आमेर किले के दर्शनीय स्थल

अगर आप जयपुर के आमेर किले में भ्रमण हेतू जा रहे है, तो आप कभी भी निराश नहीं होंगे। क्योंकि आमेर महल में बहुत से दर्शनीय स्थल है जिनमें सबसे प्रमुख शीश महल, दीवाने आम, गणेश पोल, शीला माता मंदिर, सूरज पोल, भूल भुलैया एवं लाइट एंड साउंड शो है। आइए जानते है आमेर दुर्ग के दर्शनीय स्थलों के विषय में :-

आमेर का शीश महल – Sheesh Mahal

आमेर किले का मुख्य आकर्षण है आमेर का शीश महल । शीश महल में छत एवम् खंबो और दीवारों पर शीशे की जड़ाई इस तरह की गई है की जरा सा प्रकाश पूरे महल को जगमग कर देता है, यह दृश्य देखने में अत्यंत सुंदर लगता है । देश-विदेश से पर्यटक शीश महल को देखने के लिए आते है ।

आमेर किले का दीवान-ए-आम – Diwan-E-Aam

आमेर दुर्ग के अंदर स्थित दीवान-ए-आम आमेर की आम जनता के बैठने के लिए बनाया गया था । यह हाल तीन तरफ से खुला है, जो दो स्थंभो के आधार पर मजबूती से खड़ा है । दीवान-ए-आम की दीवारों पर छोटे-छोटे कांच के मोजेक टुकड़ों से सजावट की गई है, जो देखने में बहुत सुंदर लगती है ।

शीला देवी मंदिर – Shila Devi Temple Jaipur

आमेर किले के अंदर जलेबी चौक के दायीं और एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है, जो जयपुर के शासकों की इष्ठ देवी शीला देवी का मंदिर है । शीला माता को काली माता का ही स्वरूप माता जाता है । मंदिर का द्वार चांदी के पत्रों से सजा हुआ अत्यंत सुंदर लगता है। मंदिर के निर्माण में एक कथा प्रचलित है की जब राजा मानसिंह अपनी बंगाल विजय की यात्रा पर थे, तब उनको स्वप्न में माता ने दर्शन दिए और अपनी मूर्ति को आमेर में स्थापित करने को कहा था। तभी से जयपुर और आमेर के आस-पास शीला माता की बहुत आस्था है और प्रतिवर्ष माता रानी का मेला भरता है।

आमेर फोर्ट का गणेश पोल – Ganesha Pol

आमेर किले का मुख्य प्रवेश द्वार है गणेश पोल, इसी द्वार से राजा अपने महल के अंदर प्रवेश करता था। गणेश पोल की दीवारों पर बहुत ही सुंदर कलाकृतियां उकेरी गई है। गणेश पोल के ऊपर एक बहुत ही सुंदर जालीदार झरोखा का बनाया गया है, यह झरोखा महल में रहने वाली रानिया के लिए बाहर का दृश्य देखने के लिए बनाया गया था।

सुख निवास – Sukh Niwas

दीवान-ए-आम के निकट स्थित सुख निवास अपनी निर्माण शैली के लिए प्रसिद्ध है, सुख निवास का निर्माण चंदन और हाथी दांत से किया है जिसमे राजा अपनी रानियों के साथ समय व्यतीत करते थे ।

आमेर किला घूमने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Amber Fort Jaipur Hindi

अगर आपने जयपुर आने का प्लान बनाया है एवं आमेर किला घूमने जा रहे हैं तो आपके लिए सबसे अच्छा समय नवंबर से लेकर मार्च तक का है। क्योंकि राजस्थान एक गर्म प्रदेश है एवं आमेर फोर्ट एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है इसलिए अगर आप साल के बाकी महीनों में आमेर फोर्ट घूमने आते हैं तो यह आपके लिए अत्यंत कष्ट दाई साबित हो सकता है। इसलिए आप जब भी आमेर दुर्ग घूमने आए तो सर्दियों के महीनों में ही आए।

कैसे पहुंचे आमेर किला – How To Reach Amber Fort Jaipur

आमेर किला राजस्थान की राजधानी जयपुर से उत्तर की ओर 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए आपको आमेर आने के लिए सबसे पहले जयपुर आना होगा। जयपुर आप परिवहन के तीनों साधनों ( बस, ट्रैन और हवाई जहाज ) के द्वारा पहुंच सकते हैं। जयपुर से आपको आमेर दुर्ग के लिए प्राइवेट एवं सरकारी बस की सुविधा मिल जाती है।

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आप जयपुर उतरकर प्राइवेट टैक्सी बुक कर सकते हैं, जो आपको बहुत कम दाम में आमेर दुर्ग तक पहुंचा देगी। जयपुर बस अड्डे एवं रेलवे स्टेशन से आपको एम आई रोड या अजमेरी रोड के लिए जाना होगा वहां से आपको सरकारी बस एवं प्राइवेट बस ऑटो टैक्सी मिल जाएगी।

एम्बर फोर्ट लाइट एण्ड साउंड शो

राजस्थान का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है, इसलिए इतिहास की घटनाओं का उल्लेख करने के लिए Amber Fort में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है। यह शो मशहूर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन की आवाज में होता है, शो की अवधि लगभग 50 मिनट की होती है।

इस शो में जयपुर आमेर एवं राजस्थान के विभिन्न स्थलों का गौरवशाली इतिहास चित्रों एवं साउंड के माध्यम से दर्शकों को बताया जाता है। लाइटिंग और साउंड के हिसाब से यह शो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बहुत ही रोमांस करी अनुभव प्रदान करता है।

आमेर फोर्ट की टिकट

भारतीय पर्यटक 25₹
विदेशी पर्यटक200₹
विद्यार्थीस्कूल आई डी साथ हो तो 10₹ टिकट
लाइट एंड साउंड शो 295₹

आमेर किला नक्शा – Amer Fort Location

आमेर किले की फोटो गैलेरी – Amer Fort Images

FAQ’s About Amber Fort Jaipur


आमेर क्यों प्रसिद्ध है?

आमेर अपनी वास्तुकला एवं भव्य महलों और विशाल मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, यहाँ प्रतिदिन 5 हजार से अधिक सैलानी भ्रमण हेतु आते है। आमेर किला राजपूत कला का उत्तम उदाहरण है, यहाँ के सुन्दर महलों के कारण बहुत सी फिल्मों की शूटिंग यहाँ होती रहती है।


आमेर दुर्ग का निर्माण किसने और कब करवाया?

आमेर दुर्ग के निर्माण में बहुत सी कथाएं प्रचलित है, ज्ञात तथ्यों के अनुसार 11वी शताब्दी में सबसे पहले काकिल देव ने इस किले का निर्माण शुरू किया था। बाद में 16वी शताब्दी में राजा मानसिंह कछवाहा ने इस किले को वर्तमान स्वरुप प्रदान किया था।


52 दुर्गों का लाडला दुर्ग कौन सा है?

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित बाला दुर्ग को 52 दुर्गों का लाडला दुर्ग कहाँ जाता है।

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